झारखंड की राजधानी रांची में सड़कों पर सरना झंडे के अपमान से तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गयी है। सुबह से ही झारखंड पाहन महासंघ सहित विभिन्न आदिवासी संगठनों तथा सरना समिति के सदस्य ‘सरना झंडा’ उखाड़ने और जलाने के विरोध में प्रदर्शन करते नजर आए। राजधानी रांची में कई जगहों पर लोगों ने बीच सड़क पर टायर जलाकर यातायात को रोका। प्रदर्शन से आवागमन प्रभावित हुआ। तनाव को देखते हुए सभी इलाके में जवानों को तैनात किया गया है। मुख्य रूप से बिरसा चौक इलाके में लोगों का प्रदर्शन देखा जा रहा है।

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150 हिरासत में, 40 मजिस्ट्रेट तैनात

बवाल के मद्देनजर पुलिस ने 150 लोगों को हिरासत में लिया है। शहर में 40 मजिस्ट्रेट तथा 800 पुलिसकर्मियों की तैनाती हुई है। विरोध-प्रदर्शन कर रहे लोग अभी भी सड़क पर मौजूद हैं। पुलिस हर इलाके में वीडियो रिकॉर्डिंग करवा रही है। इनमें कई अतिसंवेदनशील क्षेत्र भी हैं। इसका मकसद सड़क पर बवाल करने वालों को चिन्हित करना है। शहर में आम लोगों की सुरक्षा के लिए अग्निशमन दस्ता और एंबुलेंस की तैनाती भी की गई है।

सरना झंडा को उखाड़ फेंका, हुआ बवाल

दरअसल रांची बंद का कारण यह है कि लालपुर इलाके में स्थित करम टोली में आदिवासी जमीन पर लगे सरना झंडा को सरहुल के दिन असामाजिक तत्वों के द्वारा फेंक दिया गया था। इसके विरोध में संगठनों के द्वारा बंद का आह्वान किया गया था।

सड़कों पर जले टायर

इस प्रदर्शन का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें लोगों को सरना झंडे लिए देखा जा सकता है। प्रदर्शन कर रहे लोगों के हाथों में सरना झंडा, रांची बंद आदि जैसे बैनर देखे जा रहे हैं। सड़कों पर टायर जलाए गए। महिलाएं सफेद कपड़ों में दिखीं। कुछ प्रतीक स्वरुप लाल साड़ी पहने दिखीं जो सरना ध्वज के समान थी।

सीएम आवास और सचिवालय के पास धारा-144

इससे पहले, केंद्रीय सरना समिति के बैनर तले एक दिन पहले शाम में आदिवासी निकायों ने रांची में मशाल जुलूस निकाला। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के घर और सचिवालय के 200 मीटर के दायरे में सीआरपीसी की धारा- 144 लगाई गई थी।

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