कोरोना  काल में  महंगाई   ने  आम  आदमी  की  कमर  तोड़  दी  है , पेट्रोल  डीजल  के  दामों  में  भारी  इजाफा  हुआ  है , इसके  चलते  खाद्य  और कई  चीजों  में भारी बढ़ोतरी  हुई  है , आम  आदमी  को भारी  मुश्किलों  का  सामना  करना  पड़  रहा  है , कई  कंपनियां बंद  हो  गई  हैं , लाखों लोग  बेरोजगार  हो  गएँ  हैं , लोगों  को  नौकरी  की  तलाश  है  लेकिन  आलम  ये  है  की  उन्हें  उनके  योग्यता  के  मुताबिक  नौकरी  नहीं  मिल  रही  है ,   उन्हें  घर  से  काफी  दूर  जाना  पड़ता  है , वे  दर  दर  की  ठोकरें  खाने  को  मजबूर  हैं , आलम  ये  है  की  उनका  परिवार  चलाना  मुश्किल  हो  रहा  है , सरकार  का  प्राइवेट  कर्मचारियों  पर  कोई  ध्यान  नहीं  है , कुछ  कंपनियों  में  वक्त से  ज्यादा  काम  लिया  जा  रहा  है , मुश्किलों  के वक्त भी  उन्हें  छुट्टी  नहीं  दी  जाती , मजबूरी  में  उन्हें  ऐसे  बक्त  में  भी  काम  करना  पड़ता  है ,  जब  उन्हें  परिवार  की  जरूरतें  होती  हैं .
पिछले  2 सालों में  महंगाई  की  रफ़्तार  डबल  हो  चुकी  है , तेल  पेट्रोल  डीजल , किराने  का  सामान दाल , चावल सेंचुरी  पार  कार  चुकी  है ,  गाड़ियों का  भाड़ा  डबल  हुआ  है , जहाँ  भाड़ा  30 रुपये   देने  पड़ते  थे,  आज  वहां  50 रुपये  देना  पड़  रहा  है .
इतनी  महंगाई  के  बाबजूद  जो  प्राइवेट  कर्मचारी  या  मजदूर  काम  कर  रहे  हैं , उनकी  तनख्वाह इतनी  नहीं है  की  अपने  घर परिवार का  ठीक तरीके  से  गुजर बसर कर  सकें , बच्चों की  पढाई फीस  में  भी  इजाफा  हुआ  है , यहाँ  तक  की  खाताधारकों  का  बैंक  में  जमा  पैसे  का  व्याज  कम  हुआ  है , जहाँ  पहले  6.30% या 7 % व्याज  मिलता  था  आज  घटाकर  5 % या  5.30% कर  दिया  गया  है.
इसका सीधा  मतलब  जनता  को  हर  तरफ  से  लूट  लो , सरकार से सीधा सवाल ये  है  की  सरकार  कर  क्या  रही  है , जनता  को  फायदा  कहाँ हो  रहा  है , सरकार  रोजगार  क्यों  नहीं  दे  पा रही है , महंगाई  पर  कंट्रोल  क्यों  नहीं  कर  रही  है , सरकार  का  आगे  का  प्लान  क्या  हैं , क्या सरकार  को इन  सबकी  जानकारी  नहीं , केंद्र  और  राज्य  सरकार  के  प्रतिनिधि  क्या  कर   रहें  हैं , क्या  सरकार  तक  जनता  की  बात  नहीं  पहुंच रही  है  या  सरकार   कुछ  करना  ही  नहीं  चाहती .
हलाकि  जनता  ने  इसके  पहले  ऐसी  महंगाई  कभी  नहीं  देखी और देखी  भी  तो  कुछ  फीसदी  ही  बढ़ी , लेकिन  इन  2   सालों  में  ऐसे  डबल  महंगाई भी  नहीं  हुई, चुनाव के  वक्त  सभी दलों  के नेता   गलियों  में  दुनिया  भर  की  बाते  करते  हैं , लेकिन  जो  मुख्य  मुद्दा  है  उस  पर  कोई  बात  नहीं  करता , लेकिन  इन  सबके  बीच  सभी  मुश्किलों   का  सामना  आम जनता  को  ही  करना  पड़ता  है .
ये  कहना  ठीक  होगा  की  सभी  दलों  के  नेता  मुश्किलों  के  वक्त  खुद  जख्मी हो  जाते  हैं , चुनाव  के  वक्त  जनता पर मरहम  लगाते  हैं .
हालाकि अब  फिर से  कुछ  महीनों बाद कई  राज्यों  में  चुनाव  होने  हैं और  सभी  दलों  के  नेता  वोट  मांगने  जनता  तक  पहुंचेंगे जिसका जवाब शायद इन नेताओं के पास भी नहीं होगाI

महंगाई की  मार  जनता  परेशान

जनता का सवाल, हमारी भी सुनो सरकार

कुछ तो महंगाई कम करो सरकार

हर-हर  मोदी , घर-घर  मोदी.

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