एक ऐसी महामारी जिसे ना कभी दुनिया ने देखा था ना इसे कभी महसूस किया. लेकिन पिछले डेढ़ सालों से पूरी दुनिया इस त्रासदी का गवाही है. पूरी दुनिया इस महामारी से ग्रसित है. लाखों लोगों ने कोरोना वायरस से अपनी जिंदगियों को खोया है. डेढ़ साल पहले ना लोगों के पास इस वायरस से बचने का कोई उपाय था. ना ही इससे लड़ने के लिए सटीक दवाई. लोगों के पास थी तो सिर्फ एक उम्मीद की किरण. देश की सरकार से। प्रधानमंत्री से। मेडिकल सिस्टम से। लाखों-करोड़ो डॉक्टर से। अपने वैज्ञानिकों से।

आज भारत की 138 करोड़ लोग जश्न मना रहें हैं क्योंकि चीन के बाद भारत दूसरा ऐसा मुल्क बन गया जिसने 100 करोड़ वैक्सीन डोज का आंकड़ा पार कर लिया है। ये अपने आप में एक इतिहास रच दिया है। जिस देश के पास कोरोना वायरस से लड़ने के लिए एक साल पहले कुछ नहीं था वही देश वैक्सीन बनाया भी 100 करोड़ डोज लगाया भी और अपने साथ साथ कई दूसरे देशों को भी मानवता, इंसानियत के नाते मुफ्त में वैक्सीन मुहैया करवाया। ये उपलब्धि भारत के प्रत्येक नागरिक की है।

पिछले वर्ष जब भारत के कोरोना का केस सामने आया तभी से भारत इससे लड़ने के लिए वैक्सीन पर काम शुरू कर दिया. हमारे वैज्ञानिक, डॉक्टर्स दिन रात मेहनत करके देशवासियों के लिए वैक्सीन विकसित की। आज दुनिया की सबसे सस्ती वैक्सीन भारत में है। मेड इन इंडिया के तहत भारत के लोगों के पास भारत की बनी वैक्सीन उपलब्ध है ये भारत की बहुत बड़ी जीत है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा इस बात पर जोर दिया कि अधिक से अधिक लोग वैक्सीन लगवाए। इसके लिए उन्होंने मुफ्त वैक्सीन लगाने का ऐलान किया। देश में 16 जनवरी से वेक्सीनेशन अभियान की शुरुआत हुई थी। शुरुआती दिनों के 20 करोड़ वैक्सीन डोज लगाने में 131 दिनों का समय लगा। इस अभियान को तेज करते हुए अगले 20 करोड़ डोज 52 दिन में दिए गए। 40 से 60 करोड़ डोज देने में 39 दिन लगे। 60 से 80 करोड़ डोज देने में 24 दिन का समय लगा। इसके बाद 80 से 100 करोड़ डोज देने में 31 दिन का वक्त लगा। अगर इसी रफ्तार से वेक्सीनेशन होता रहा तो देश में 216 करोड़ वैक्सीन डोज लगाने में 175 दिन और लगेंगे और ये बहुत बड़ी उपलब्धि होगी।

हमे ये भी याद रखना होगा कि हम भले ही 100 करोड़ वैक्सीन डोज लगा चुके है लेकिन ये मात्र 20 फीसदी ही है। यानि हम कह सकते हैं 20 फीसदी लोग ही पूरी तरह से वेक्सीनेट हुई हैं। अभी 80 फीसदी पूरी तरह से वेक्सीनेट होना बाकी है। यही बात प्रधानमंत्री राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा था जैसे आप घर से बाहर निकलने वक्त जूते पहनना नहीं भूलते वैसे ही मास्क लगाना मत भूलिए। इसको जूते के तरह ही जिन्दगी का हिस्सा बनाइए।

आज हम 100 करोड़ वैक्सीन डोज पूरा करने का भले ही जश्न मनाए लेकिन हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि इसमें देश के हर एक नागरिक, आशा वर्कर, डॉक्टर्स, टीचर, छात्र इत्यादि हम सबों ने किसी ना किसी रूप में योगदान दिया है।

देश की 8 करोड़ आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव जाना और वहां लोगों में संदेश फैलाना और फिर उन्हें टीका केंद्रों तक लाने का बीड़ा उठाया। उनके इन महत्वपूर्ण प्रयासों से इस अभियान का गांव-गांव में प्रचार प्रसार संभव हुआ। अगर इन लोगों ने प्रतिबद्धता नहीं दिखाई होती तो सरकारी तंत्र असहाय रह जाता। सबसे बड़ी बात है कि इन लोगों ने उस मिथ्या प्रचार को खत्म करने में बड़ी भूमिका निभाई जिसमें कोरोना के टीके को लेकर तमाम तरह की निगेटिव बातें कही जा रही थीं। लेकिन इन लाखों आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने समझदारी और प्रेम भाव से लोगों को समझाया-बुझाया और 100 करोड़ डोज लगाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाया। इन कर्मवीरों ने कोई कसर नहीं छोड़ी और अपनी जान पर खेल गईं। यह कोई आसान काम नहीं था क्योंकि भारत बहुत बड़ा देश है यहाँ गांवों की संख्या बहुत है

जब पहली बार देश में वैक्सीन बनकर तैयार हुआ तो दिल के किसी कोने में लोगों को वैक्सीन लगवाने का डर भी था. समाज में इसको लेकर कई तरह के अफवाहें थी। तरह तरह की बातें थी। दुष्प्रचार थे। सरकार के लिए, प्रशासन के लिए, डॉक्टर्स के लिए वैक्सीन अभियान को आगे बढ़ाना एक चुनौती थी।
कई जगहों से ऐसी भी खबरें आती थी कि डॉक्टर्स जब वैक्सीन लगाने के लिए गांवों में कैंप लगाते तो लोग उसे मार कर भगा देते। गांव में कैंप लगाने नहीं देते। वैक्सीन डोज को डब्बे समेत नहर नदी में फेंक देते। इसी को देखते हुए सरकार ने स्कूल, कॉलेज, दीवारों पर पोस्टर लगवाया। टीवी, अखबार के जरिए लोगों को वैक्सीन लगवाने के किए प्रेरित किया। लोगों के फोन कॉलर ट्यून में अमिताभ बच्चन की आवाज में वैक्सीन लगवाने के किए अपील सेट करवाया।

खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार राष्ट्र के नाम संबोधित में लोगों से वैक्सीन लगवाने की अपील की। मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने अपील की। उनके मंत्री, विधायक, सांसद अपने अपने क्षेत्रों में लोगों से वैक्सीन लगवाने की अपील की। स्कूल, कॉलेज के जरिए नुक्कड़ नाटक जैसे कार्यक्रम करवाए गए लोगों को जागरूक किया गया। सोशल मीडिया के जरिए कैंपेनिंग किया गया तब जाकर धीरे धीरे लोग वैक्सीन लगवाने के किए आगे बढ़े और 100 करोड़ का आंकड़ा पूरा हुआ।

आज हमारे देश में कोरोना केस नाम मात्र के है लेकिन अभी भी इससे सचेत रहने की जरूरत है क्योंकि हाल ही के दिनों में हमने कई ऐसे ऐसे फोटो और वीडियो देखें हैं जिनमें दिख रहा है कि लोगों ने सावधानी बरतना बंद कर दी है या लापरवाही कर रहें हैं। बिना मास्क के घूम रहें है ये उनके लिए, उनके परिवार के लिए, समाज के लिए वो संकट लाने का काम कर रहें है उन्हें सचेत रहने की जरूरत है। अभी भी मास्क लगाकर बाहर निकलने की जरुरत है वैक्सीन लगवाने की जरुरत है।

{ ये लेख दीपक राजसुमन के निजी विचार हैं }

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