प्रवासी मजदूरों के पंजीकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के प्रयासों को नाकाफी बताया है. शीर्ष अदालत का कहना है कि प्रवासी कामगारों के पंजीकरण की प्रक्रिया बेहद धीमी है और प्रवासी कामगारों के पंजीकरण में तेजी लाई जानी चाहिए ताकि उनको कोरोना महामारी के दौरान संचालित की जाने वाली योजनाओं का लाभ दिया जा सके. सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने यह भी कहा कि वह असंगठित क्षेत्रों के कामगारों के पंजीकरण के मसले पर केंद्र और राज्य सरकारों की कोशिशों से संतुष्‍ट नहीं है. न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एमआर शाह की पीठ ने प्रवासी और असंगठित क्षेत्रों के कामगारों के पंजीकरण के मसले पर सुनवाई की. अदालत ने कामगारों के पंजीकरण की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि योजनाओं का लाभ इन लोगों को तभी मिल सकता है जब अधिकारी उनकी पहचान करके उनका पंजीकरण कर लेंगे. शीर्ष अदालत का साफ कहना था कि पंजीकरण की प्रक्रिया बेहद धीमी है और हम असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों के पंजीकरण के मसले पर केंद्र और राज्य सरकारों की कोशिशों से संतुष्ट नहीं हैं.

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