देश की सर्वोच्च अदालत ने अग्निपथ योजना का विरोध करने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना को बरकरार रखने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को भी बरकरार रखा है। ये याचिकाएं दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखने के खिलाफ दायर की गई थीं। अग्निपथ योजना के अनुसार 17-साढ़े 23 वर्ष की आयु के लोगों को चार साल के कार्यकाल के लिए सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए आवेदन करने के लिए पात्र बनाया गया था।

अग्निपथ योजना की वैधता की ​पुष्टि

सुप्रीम कोर्ट ने सशस्त्र बलों में प्रवेश के लिए सरकार की अग्निपथ योजना को बरकरार रखने वाले दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने से संबंधित दो याचिकाओं को खारिज कर दिया और योजना की वैधता की पुष्टि की। इसके साथ ही अग्निपथ योजना शुरू होने से पहले भारतीय वायुसेना में भर्ती से जुड़ी एडवोकेट प्रशांत भूषण की याचिका पर सुनवाई के लिए कोर्ट ने 17 अप्रैल की तारीख तय की है।

हम हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप नहीं करेंगे- SC

मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा कि अग्निपथ योजना की शुरुआत से पहले रक्षा बलों के लिए रैलियों, शारीरिक और चिकित्सा परीक्षणों जैसी भर्ती प्रक्रियाओं के माध्यम से चुने गए उम्मीदवारों के पास नियुक्ति का निहित अधिकार नहीं है।”हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ गोपाल कृष्ण और एडवोकेट एमएल शर्मा द्वारा दायर अलग-अलग याचिकाओं को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि “क्षमा करें, हम हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहेंगे. हाईकोर्ट ने सभी पहलुओं पर विचार किया था.”

CJI डी .वाई. चंद्रचूड़ ने कहा, “हमारे लिए हस्तक्षेप करने के लिए कुछ भी नहीं है। यह सार्वजनिक रोजगार का मामला है, अनुबंध का नहीं।”

रक्षा-राष्ट्र हित में रिक्तियों को भरना था- ASG

केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ को बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले में इन मुद्दों पर विस्तार से विचार किया गया है। “कोविड समय के दौरान, सभी प्रकार के मुद्दे थे- ये असाधारण समय थे जिनसे संस्थान निपट रहे थे। यह चुनने की प्रक्रिया नहीं है। हमें रक्षा और राष्ट्रीय हित के हित में रिक्तियों को भरना था।” एएसजी ने जोर देकर कहा, “अत्यावश्यकता के कारण हमें इस तरह से भर्तियों को संशोधित करने की आवश्यकता थी।”

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